मध्य प्रदेश में जल गंगा संवर्धन अभियान की ऐतिहासिक सफलता: मुख्यमंत्री यादव ने “सदानीरा जल संसाधन” पुस्तिका का विमोचन किया

भोपाल: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आज वल्लभ भवन में जल संसाधन विभाग की पुस्तिका “सदानीरा जल संसाधन: बहती रहे जल की धारा” का विमोचन किया। यह पुस्तिका प्रदेश में 30 मार्च से 30 जून 2025 तक चलाए गए जल गंगा संवर्धन अभियान की उपलब्धियों पर केंद्रित है, जिसने जल संरक्षण को एक जन-आंदोलन में बदल दिया। कार्यक्रम में जल संसाधन मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट, पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री प्रहलाद सिंह पटेल और एमएसएमई मंत्री श्री चैतन्य कुमार कश्यप उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री यादव ने अभियान की सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा, “हमारी नदियाँ, तालाब और जल स्रोत जीवन का आधार हैं। सरकार और समाज के इस संयुक्त प्रयास ने मध्य प्रदेश को जल प्रबंधन में अग्रणी बनाया है।” उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “कैच द रेन” अभियान के सिद्धांतों को आत्मसात करते हुए “खेत का पानी खेत में, गाँव का पानी गाँव में” के मॉडल को साकार किया।

अभियान के तहत प्रदेश के 55 जिलों में 2,190 वृहत जल संरचनाओं का जीर्णोद्धार किया गया, जिसमें तालाबों, नहरों और जलाशयों की सफाई, पुनर्निर्माण और सौंदर्यीकरण शामिल है। उज्जैन, इंदौर, नर्मदापुरम और सागर जैसे क्षेत्रों में विशेष प्रगति दर्ज की गई। ऐतिहासिक जल स्रोतों जैसे 300 वर्ष पुरानी माता अहिल्या बावड़ी और रतनतलाई तालाब के जीर्णोद्धार ने पर्यटन और जल संरक्षण दोनों को बढ़ावा दिया।

मंत्री श्री सिलावट ने बताया कि अभियान ने डिजिटल मानचित्रण, जलवायु-अनुकूल संरचनाओं और सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से जल प्रबंधन को सुदृढ़ किया। ग्रामीणों, युवाओं और अधिकारियों की सहभागिता से केरवा बांध की सफाई और विदिशा के जमवार तालाब में श्रमदान जैसे कार्यों ने लोगों में जल संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाई।

इस अभियान ने न केवल भूजल स्तर में सुधार किया, बल्कि कृषि उत्पादकता और पर्यावरण संतुलन को भी मजबूती प्रदान की। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सफलता मध्य प्रदेश के लिए गौरव का विषय है और देश के अन्य राज्यों के लिए एक प्रेरणा बनेगी।

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