एम्स भोपाल के नेत्र विज्ञान विभाग ने 31 अगस्त 2025 को राष्ट्रीय नेत्र दान पखवाड़े के
अंतर्गत एक राष्ट्रीय सतत चिकित्सा शिक्षा (CME) कार्यक्रम का आयोजन किया। कार्यक्रम का
उद्घाटन एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक प्रो. (डॉ.) माधवानंद कर ने किया। इस अवसर पर
विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. प्रभाकर तिवारी, डॉ. निचलानी और डॉ. ललित श्रीवास्तव भी
उपस्थित रहे। सीएमई में प्रतिष्ठित विशेषज्ञों ने अपनी विशेषज्ञता और अनुभव साझा किए। डॉ.
चिंदन मल्होत्रा (पीजीआई चंडीगढ़) ने पेनेट्रेटिंग केराटोप्लास्टी, ट्रांसप्लांटेशन और क्रॉस-लिंकिंग
विषय पर मुख्य रूप से चर्चा की। डॉ. नेहा चतुर्वेदी ने स्टेरॉयड-प्रेरित ग्लॉकोमा पर प्रस्तुति दी,
वहीं डॉ. प्रेरणा उपाध्याय ने केमिकल बर्न और नेत्र आघात के प्रबंधन पर अपने विचार व्यक्त
किए। इन सत्रों ने प्रतिभागियों को नेत्र विज्ञान और दृष्टि पुनर्स्थापन के नवीनतम पहलुओं से
समृद्ध किया।
कार्यक्रम में स्नातकोत्तर विद्यार्थियों, इंटर्न और संकाय सदस्यों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, जिससे
यह आयोजन संवादात्मक और ज्ञानवर्धक बन गया। कार्यक्रम के अंत में एक क्विज़ प्रतियोगिता
का आयोजन किया गया जिसमें विजेताओं को आकर्षक पुरस्कार प्रदान किए गए। यह राष्ट्रीय
सीएमई न केवल वैज्ञानिक विचार-विमर्श का मंच बनी, बल्कि नेत्र दान के महत्व के बारे में
जागरूकता फैलाने की दिशा में भी एक अहम पहल सिद्ध हुई। अधिक से अधिक लोगों को नेत्र
दान के लिए प्रेरित कर, इस आयोजन ने एम्स भोपाल की स्वास्थ्य शिक्षा और सार्वजनिक
स्वास्थ्य को सशक्त बनाने की प्रतिबद्धता को और प्रबल किया है।
एम्स भोपाल में नेत्र दान पर राष्ट्रीय सीएमई, जागरूकता और दृष्टि पुनर्स्थापन पर जोर
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