
डॉ. भूपेन्द्र कुमार सुल्लेरे
भारतीय सिनेमा का वैश्विक विस्तार
भारतीय सिनेमा अब केवल ‘बॉलीवुड गाने’ या ‘नृत्य प्रधान फिल्में’ तक सीमित नहीं है। आज यह तकनीक, कथा-विधान, विविधता, विचारधारा और वैश्विक मंचों पर अपने प्रभाव के बलबूते विश्व सिनेमा को दिशा देने का कार्य कर रहा है। ऑस्कर से लेकर कान्स, बर्लिन और टोरंटो तक, भारतीय फिल्में अब केवल भाग नहीं लेतीं बल्कि विमर्श रचती हैं।
वैश्विक स्तर पर भारतीय सिनेमा के पाँच निर्णायक प्रभाव
(1) लोक आधारित कथावस्तु का प्रभाव
फिल्में जैसे RRR, The Lunchbox, Court, Kantara, Village Rockstar, Koozhangal, Jai Bhim, Karnan — विश्व को यह बता रही हैं कि ग्रामीण और परंपरागत कथाएँ भी वैश्विक दर्शकों को छू सकती हैं।
अब ‘स्लमडॉग मिलियनेयर’ की तरह भारतीय गरीबी को पश्चिमी नज़र से नहीं, बल्कि भारत की आत्मा से देखा जा रहा है।
(2) प्रयोगशीलता और शैलीगत नवाचार
Ship of Theseus, Tumbbad, Andhadhun, Paatal Lok, Sacred Games जैसे प्रयोग दर्शाते हैं कि भारत में अब सिने-गंभीरता और शैलीगत परिपक्वता विकसित हो चुकी है।
यह सिनेमा समानांतर और मुख्यधारा दोनों के बीच की खाई को पाट रहा है।
(3) डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से वैश्विक पहुंच
Netflix, Amazon Prime, SonyLIV, ZEE5 जैसे मंचों ने भारतीय क्षेत्रीय भाषाओं की कहानियों को ग्लोबल ऑडियंस तक पहुँचाया है।
Malayalam, Marathi, Tamil, Assamese फिल्में अब जापान, यूरोप, अमेरिका में दर्शकों द्वारा पसंद की जा रही हैं।
(4) सांस्कृतिक कूटनीति और भारत की सॉफ्ट पॉवर
Namaste London, RRR, Baahubali, Pathaan जैसी फिल्में भारत की संस्कृति, जीवन-मूल्य और वीरगाथाओं को अंतरराष्ट्रीय दर्शकों तक पहुंचा रही हैं।
सिनेमा अब भारत की सांस्कृतिक राजदूत की भूमिका में है।
(5) तकनीकी आत्मनिर्भरता और VFX नेतृत्व
Baahubali, Brahmastra, Adipurush, RRR जैसी फिल्मों ने साबित कर दिया कि भारत अब VFX तकनीक, CGI, साउंड मिक्सिंग जैसे क्षेत्रों में पश्चिम से प्रतिस्पर्धा कर सकता है।
Prime Focus, Red Chillies VFX, Makuta VFX जैसी भारतीय कंपनियाँ हॉलीवुड प्रोजेक्ट्स में भी शामिल हैं।
वैश्विक मंचों पर भारत की उपस्थिति: प्रमुख घटनाएँ
घटना प्रभाव
Oscar 2023: RRR का “Naatu Naatu” — सर्वश्रेष्ठ ओरिजिनल सॉन्ग भारत की भाषायी फिल्में अब मेनस्ट्रीम ऑस्कर श्रेणियों में जीत रही हैं
Cannes Film Festival में भारत ‘Country of Honour’ (2022) भारत की फिल्म-विविधता को वैश्विक मान्यता
IFFI Goa – अब एशिया का प्रमुख फिल्म बाजार यूरोप-एशिया सिनेमा का मिलन बिंदु बनता भारत
WAVES Summit 2025 – मुंबई में आयोजित भारत अब मीडिया-तकनीक, कंटेंट, संस्कृति का केंद्र बन रहा है
भारत से सीख रही दुनिया: वैश्विक सिनेमा में भारतीय दृष्टिकोण
कथा-गठन में भावनात्मक गहराई: पश्चिमी सिनेमा अब Linear से nonlinear storytelling की ओर बढ़ रहा है, जो भारतीय पौराणिक पद्धति का मूल है (e.g., Interstellar, Tenet जैसी फिल्में)।
गीत-संगीत की उपयोगिता: पहले आलोचना होती थी कि “भारतीय फिल्में गानों से भरी होती हैं”, अब यही स्टाइल La La Land, Greatest Showman, Encanto जैसी फिल्मों में देखा गया।
बॉयोपिक व राष्ट्रवाद का संतुलन: Sardar Udham, Rocketry, Shershaah जैसी फिल्में संतुलित राष्ट्र गौरव को प्रस्तुत करती हैं, जिसे अब वैश्विक पटल पर भी स्वीकार्यता मिल रही है।
क्षेत्रीय सिनेमा: भारत की सच्ची ग्लोबल ताकत
तमिल सिनेमा: Jai Bhim, Asuran, Karnan – जाति विमर्श और दलित चेतना को वैश्विक विमर्शों से जोड़ती हैं।
मलयालम सिनेमा: Drishyam, Jallikattu, Iratta – सामाजिक यथार्थ और गहन मानवीय मनोविज्ञान का प्रभावशाली चित्रण।
मराठी सिनेमा: Court, The Disciple, Fandry – समाज, न्याय और संगीत पर गहरा विमर्श।
असमिया और पूर्वोत्तर सिनेमा: Village Rockstars, Aamis – प्रकृति, यथार्थ और संस्कृति की नई परिभाषा।
विश्व सिनेमा को भारत की दिशा
भारतीय सिनेमा अब केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि वैश्विक विमर्शों, तकनीकी उन्नयन, सामाजिक चेतना और सांस्कृतिक संवाद का वाहक बन चुका है। भारत ने यह सिद्ध किया है कि—
“कहानियाँ सीमाओं से नहीं, संवेदनाओं से जुड़ती हैं।”
आज जब विश्व सिनेमा विविधता, समावेशन और आत्म-अन्वेषण की ओर बढ़ रहा है, भारतीय सिनेमा उसे गति, गहराई और गरिमा प्रदान कर रहा है।
