मध्य भारत प्रांत में पूजनीय रज्जू भैया के संस्मरण: विचार, संवेदना और राष्ट्र निर्माण की अमिट छाप

भोपाल, 14 जुलाई 2025। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के पूर्व सरसंघचालक प्रो. राजेंद्र सिंह उर्फ ‘रज्जू भैया’ का मध्य भारत प्रांत (मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, विदिशा-झाँसी) से गहरा आत्मीय संबंध रहा। उनके विचारों, प्रवासों और मार्गदर्शन ने यहाँ के संघ कार्य को न केवल संगठित किया, बल्कि उसे एक आत्मिक यात्रा का स्वरूप दिया। डॉ. भूपेंद्र कुमार सुल्लेरे द्वारा लिखित संस्मरण में रज्जू भैया के जीवन के इन पहलुओं को उजागर किया गया है।

जबलपुर: आत्मचिंतन की प्रेरणा

1982 में जबलपुर के संघ शिक्षा वर्ग में दिए गए उनके ऐतिहासिक भाषण ने अनेक युवाओं को प्रचारक जीवन की दिशा दी। उन्होंने कहा था – “संघ कार्य आत्मसंस्कार की यात्रा है, न कि केवल संगठन निर्माण” । यह विचार आज भी मध्य भारत के कार्यकर्ताओं के लिए मार्गदर्शक है।

छत्तीसगढ़: सेवा और स्थानीय नेतृत्व

वनवासी क्षेत्रों में उन्होंने “सेवा के साथ सशक्तिकरण” पर जोर दिया। बस्तर और अंबिकापुर में उनके दिशानिर्देशों ने वनवासी कल्याण आश्रम को नई ऊर्जा दी। उनका मानना था कि “सेवा तभी सार्थक है जब वह स्थानीय नेतृत्व को मजबूत करे” ।

भोपाल: शिक्षा और संस्कार का संदेश

1995 में भोपाल में आयोजित एक संगोष्ठी में उन्होंने कहा – “शिक्षा का उद्देश्य नौकरी नहीं, बल्कि संस्कार और नागरिकता है”। यह दृष्टिकोण आज विद्या भारती और सरस्वती शिशु मंदिरों के माध्यम से जीवंत है ।

ग्वालियर और रीवा: नेतृत्व का सही अर्थ

ग्वालियर में उन्होंने नेतृत्व को “सत्ता नहीं, त्याग” की संज्ञा दी। रीवा में उनका संदेश था – “संघ का कार्यकर्ता चाहे राजनीति में जाए या न जाए, पर उसका चरित्र राष्ट्रनीति का निर्माण करे” ।

प्रचारकों के साथ आत्मीयता

उनका प्रचारकों से व्यक्तिगत संवाद, पत्रों और अचानक प्रवासों के माध्यम से जुड़ाव था। उनका मूल मंत्र – “परिवर्तन परंपरा के गर्भ से ही आना चाहिए” – आज भी मध्य भारत के कार्यकर्ताओं को प्रेरित करता है । रज्जू भैया का जीवन *विवेक, विनम्रता और राष्ट्रभक्ति का प्रतीक था। आज भी मध्य भारत की शाखाओं और सेवा परियोजनाओं में उनकी विचारधारा सजीव है। उनके पदचिह्नों पर चलकर ही राष्ट्र निर्माण का संकल्प पूरा हो सकता है।

श्रद्धांजलि:
“ॐ क्रियावान् राष्ट्राय स्वाहा” – उनका जीवन इसी भावना का प्रतीक था। आज भी उनकी स्मृति हमें राष्ट्र के लिए समर्पित होने की प्रेरणा देती है।

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