
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का सबसे ज्यादा असर किशारों पर पड़ा हैं। दुनियाभर के किशोर दोस्तों से ज्यादा वक्त एआई के साथ बिता रहे हैं। अकेले अमेरिका में ही किशारों के बीच अकेलेपन का संकट इतना गहरा गया है कि 33 फीसदी किशोर अब इंसानी दोस्तों की बजाय एआई चैटबॉट्स से दोस्ती कर रहे हैं और अपने दिल की बातें साझा कर रहे हैं। हालत यह हो गई है कि किशोर अब मॉल जाना, मूवी देखना जैसी सामाजिक गतिविधियां छोड़ रहे हैं, जिससे उनमें डिप्रेशन और एंग्जायटी के मामले बढ़ रहे हैं। ऐसे में एआई ही उनका सहारा बन रहा है। कॉमन सेंस मीडिया की रिपोर्ट’ टॉक, ट्रस्ट एंड ट्रेड-ऑफ्सः हाउ एंड व्हाय टीन्स यूज एआई कंपैनियंस’ में बताया गया है कि एआई चैटबॉट का इस्तेमाल अब किशोरों के बीच एक आम चलन बन चुका है। इसके संस्थापक जेम्स पी. स्टेयर ने कहा कि किशोर अपनी भावनाएं ऐसी एआई कंपनियों से साझा कर रहे हैं जिन्हें बच्चों के हितों की कोई परवाह ही नहीं है। गोपनीयता और मानसिक स्वास्थ्य पर खतरा लेखक जेम्स ग्रेग ने चिंता जताई कि कई किशोर अपने राज एआई चैटबॉट्स को बता रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या आप चाहेंगे कि आपकी किशोरावस्था की डायरी की बातें सैम ऑल्टमैन या इलॉन मस्क के पास हों अगर एआई चैटबॉट्स सामाजिक जीवन का विकल्प बनते जा रहे हैं, यह अकेलापन दूर करने का सही विकल्प नहीं है।
